ऋषि महाजन/नूरपुर। कांगड़ा घाटी रेल सेवा को जल्द बहाल करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। जोनल रेलवे कमेटी, नॉर्दर्न रेलवे के सदस्य दीपक भारद्वाज ने कहा कि कांगड़ा घाटी रेल केवल एक रेल सेवा नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश विशेषकर कांगड़ा जिले के लाखों लोगों की भावनाओं, आजीविका और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी पहचान है।
उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से वे लगातार इस रेल सेवा को पुनः सुचारु रूप से शुरू करवाने के लिए प्रयासरत हैं। एक वर्ष पूर्व जोनल रेलवे कमेटी की पहली बैठक में उन्होंने चक्की पुल को शीघ्र चालू करने और कांगड़ा घाटी रेलवे के आधुनिकीकरण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।
दीपक भारद्वाज ने बताया कि अब चक्की पुल लगभग पूरी तरह तैयार हो चुका है और कांगड़ा घाटी रेल के कई सफल ट्रायल भी किए जा चुके हैं।
उन्होंने पूर्व मंडल प्रबंधक अशोक वर्मा तथा तत्कालीन महाप्रबंधक राजेश पांडे से भी मुलाकात कर स्थिति की जानकारी ली थी। अधिकारियों ने उन्हें बताया था कि सेफ्टी रिपोर्ट भी प्राप्त हो चुकी है। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस कारण से इस ऐतिहासिक रेल सेवा को शुरू करने में देरी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि कांगड़ा घाटी रेल किसी भी प्रकार की राजनीति का विषय नहीं होनी चाहिए। यह रेल स्थानीय व्यापार, पर्यटन और आम लोगों की आवाजाही का महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले रेल राज्य मंत्री के पठानकोट दौरे के बाद यह चर्चा फैली कि ट्रेन को पठानकोट की बजाय डलहौजी रोड से चलाया जाएगा, जिसके विरोध में कांगड़ा घाटी रेलवे संघर्ष समिति ने जिलेभर में प्रदर्शन किए थे।
दीपक भारद्वाज ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, रेल मंत्री कार्यालय तथा रेलवे अधिकारियों तक लगातार यह विषय पहुंचाया। उन्होंने राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा का आभार जताते हुए कहा कि शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने सबसे पहले कांगड़ा घाटी रेल का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि एक साल से संघर्ष की राह निभा रहे हैं,कांगड़ा घाटी रेल को फिर से बुला रहे हैं। पुल तो बनकर तैयार खड़ा है कब से,अब बस पटरियों पर रेल की सीटी का इंतजार है। उन्होंने मांग की कि 2 जून से पठानकोट से जोगिंदर नगर तक रेल सेवा नियमित रूप से शुरू की जाए, ताकि लोगों को लंबे इंतजार और परेशानियों से राहत मिल सके।