ऋषि महाजन/नूरपुर। कांगड़ा जिला के नूरपुर शिक्षा खंड के तहत राजकीय प्राथमिक पाठशाला खैरियां का वर्ष 1954-55 के आसपास बना स्कूल भवन अब पूरी तरह जर्जर होकर खंडहर में तब्दील हो चुका है।
भवन की हालत इतनी खराब है कि स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि, स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) और ग्रामीण स्वयं स्कूल पहुंचकर इसकी स्थिति पर चिंता जता चुके हैं। उनका कहना है कि भवन कभी भी भरभराकर गिर सकता है और यहां पढ़ रहे मासूम छात्रों की जान पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के सामने सबसे बड़ी समस्या सुरक्षित भवन की है। पूरे स्कूल का संचालन केवल एक कमरे में किया जा रहा है, जहां पांचों कक्षाओं के विद्यार्थियों के साथ कार्यालय, फर्नीचर और मिड-डे मील की व्यवस्था भी उसी स्थान पर है।
जगह की कमी के कारण बच्चों को कई बार पेड़ के नीचे, खुले आसमान में या बारिश और तेज धूप के बीच पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षा विभाग को कई बार भवन की जर्जर स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। न तो नए भवन का निर्माण शुरू हुआ और न ही बच्चों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
एसएमसी कमेटी और पंचायत प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द नया भवन उपलब्ध नहीं कराया गया तो पूरे पंचायत क्षेत्र के लोग सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और शिक्षा विभाग की होगी।
स्कूल प्रबंधन एवं प्रधानाचार्य अजय गुप्ता ने बताया कि भवन की स्थिति अत्यंत गंभीर है। बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है। विभाग को कई बार पत्र भेजे गए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विभाग स्वयं भवन को असुरक्षित मान चुका है तो आखिर मासूम बच्चों की जान जोखिम में क्यों डाली जा रही है? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही व्यवस्था जागेगी, या फिर समय रहते बच्चों को सुरक्षित स्कूल भवन उपलब्ध कराया जाएगा? यही सवाल आज पूरे शिक्षा तंत्र और सरकारी व्यवस्था के सामने खड़ा है।