शिमला। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान राशि में कथित हेराफेरी व चोरी का मामला सामने आने के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार पूरी तरह से सतर्क हो गई है।
राज्य के सरकारी और अन्य बड़े मंदिरों में सुरक्षा, प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता को पुख्ता करने के लिए सरकार ने एक बेहद सख्त स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) यानी विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है।
भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग (Language, Art and Culture Department) की ओर से तैयार किए गए इन नए नियमों को राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री (जिनके पास भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग का कार्यभार भी है) ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि अयोध्या जैसी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति हिमाचल में न हो, इसके लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया है।
दान राशि की कड़ी निगरानी : मंदिर में आने वाले चढ़ावे, नकदी और सोने-चांदी के आभूषणों के हिसाब-किताब को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा।
CCTV सर्विलांस को मजबूत करना : मंदिर परिसर और विशेषकर दान पेटियों (Donation Boxes) के आसपास के क्षेत्रों में हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों के जरिए 24 घंटे सख्त निगरानी रखी जाएगी।
जवाबदेही और ऑडिट : मंदिर प्रशासन की जवाबदेही तय करने के लिए समय-समय पर वित्तीय ऑडिट और रिकॉर्ड-कीपिंग को अनिवार्य किया गया है।
इससे पहले हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी अयोध्या मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे "आस्था की चोरी" करार दिया था। उन्होंने कहा था कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस प्रकार के मामलों में किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी देश के श्रद्धालुओं के विश्वास को ठेस पहुंचाती है।
इसी क्रम में सरकार ने राज्य के सभी शक्तिपीठों (जैसे कांगड़ा का बज्रेश्वरी देवी मंदिर, ज्वालाजी, चामुंडा देवी, बिलासपुर का नयना देवी और ऊना का चिंतपूर्णी मंदिर) सहित तमाम सरकारी स्वामित्व वाले मंदिरों के प्रशासन को नए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
प्रशासन का मानना है कि इन कड़े कदमों से न केवल देवभूमि के मंदिरों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे का सही और जनकल्याणकारी कार्यों में उपयोग भी सुनिश्चित हो सकेगा।