सन्नी/प्रागपुर। केन्द्र सरकार "डिजिटल इंडिया" का राग अलाप रही है, लेकिन जसवां-प्रागपुर विधानसभा क्षेत्र के कलोहा, सरड बम्मी, सरड मखनी, सरड डोगरी, बणी के हजारों लोग आज भी पत्थर युग में जीने को मजबूर हैं।
यहां जियो, एयरटेल, बीएसएनल (Jio, Airtel) और (BSNL) तीनों ने जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। 300 से लेकर 500, हजारों रुपये का महीना रिचार्ज करवाओ, बदले में मिलता है जीरो इंटरनेट और मिस कॉल। टीवी और अखबारों में 4G-5G के बड़े-बड़े होर्डिंग लगते हैं, लेकिन जमीन पर 1 KB डेटा नहीं चलता।
सबसे बुरा हाल बी एस एन एल( BSNL) का है। 2G गया, 3G गया, 4G तो सपना है। ग्रामीणों का आरोप है कि बीएसएनएल (BSNL) के साहब लोग जीप से आते हैं, 2 फोटो खिंचवाते हैं और "जांच करेंगे" बोलकर निकल जाते हैं। बीएसएनएल के उच्च अधिकारियों को दर्जनों शिकायतें भेजी गईं, लेकिन फाइलें कबाड़ बन गईं। समाधान के नाम पर जीरो।
1. 300 का रिचार्ज किस बात का?
कंपनियां हर महीने 300 रुपये लूट रही हैं। न कॉल लगती है, न नेट चलता है। ये खुली लूट नहीं तो क्या है?
2. क्या एक कॉल के लिए पहाड़ चढ़ना पड़ेगा?
घर के अंदर मोबाइल डेड। जरूरी बात करनी हो तो 2 KM चलकर टिब्बे पर जाना पड़ता है। बरसात में जान जोखिम में डालनी पड़ती है।
3. डिजिटल इंडिया या डिजिटल धोखा?
बच्चों की ऑनलाइन क्लास, बुजुर्गों की पेंशन, बैंक, आधार, राशन सब लटका पड़ा है। 4G-5G सिर्फ कागजों में दौड़ रहा है।
आक्रोशित गांववासी मनोज कुमार, सुशील कुमार, दिनेश राणा, ध्यान सिंह, लखविंदर सिंह, लक्की, पवन कुमार और शशी राणा (सन्नी) प्रदीप ,ने सरकार और कंपनियों को खुली चेतावनी दी कि हम 300 रुपये से लेकर 1000 रूपये के रिचार्ज करवाते हैं और बदले में हमें धोखा मिलता है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे होते हैं, बाद में कोई पूछता तक नहीं।
गांवासियों ने मांग की है कि फौरन नए टावर लगें और मौजूदा टावरों की क्षमता दोगुनी की जाए। वहीं बीएसएनएल (BSNL) के उपभोक्ताओं ने केंद्र सरकार से पूछा है कि बीएसएनएल (BSNL) को कब तक "बीमार कंपनी" बनाकर रखा जाएगा? ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क का स्थायी इलाज कब होगा? सवाल अब जनता का है-क्या सरकार और कंपनियां सोई हुई हैं या जानबूझकर आंखें बंद किए बैठी हैं?