ऋषि महाजन/नूरपुर। नगर परिषद नूरपुर चुनाव में भाजपा की अंदरूनी राजनीति अब खुलकर सामने आने लगी है। पूर्व मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता राकेश पठानियां की कथित अनदेखी को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या भाजपा अपने ही मजबूत जनाधार वाले नेता को किनारे लगाकर चुनावी जोखिम उठा रही है।
गौरतलब है कि पिछले नगर परिषद चुनाव में राकेश पठानिया ने अपनी राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक पकड़ के दम पर लगभग 25 वर्षों बाद नूरपुर नगर परिषद में भाजपा का परचम लहराया था। भाजपा समर्थित अध्यक्ष को परिषद की कुर्सी तक पहुंचाने में भी उनकी भूमिका निर्णायक मानी गई थी। लेकिन पांच साल बाद हालात पूरी तरह बदलते दिखाई दे रहे हैं। इस बार नगर परिषद चुनाव में भाजपा के पोस्टरों और प्रचार अभियान से पठानिया लगभग गायब नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में चर्चा यह भी है कि पंचायत चुनाव में कुछ जिला परिषद उम्मीदवारों ने खुले तौर पर पठानिया की तस्वीरों और समर्थन का इस्तेमाल किया, लेकिन नगर परिषद चुनाव में उनकी तस्वीर तक पोस्टरों से नदारद है। इतना ही नहीं, उन्हें प्रचार अभियान में भी प्रमुखता से आगे नहीं लाया गया। यही कारण है कि भाजपा की अंदरूनी रणनीति और नेतृत्व शैली पर सवाल उठने लगे हैं।
नूरपुर की राजनीति में राकेश पठानिया लंबे समय से प्रभावशाली चेहरा माने जाते रहे हैं। पंचायत से लेकर विधानसभा चुनावों तक उनकी सक्रियता और संगठन पर पकड़ किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में चुनाव के अहम समय पर उनकी सीमित भूमिका ने भाजपा के भीतर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय चुनाव केवल पार्टी चिन्ह पर नहीं, बल्कि जमीनी नेटवर्क, व्यक्तिगत प्रभाव और कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर भी लड़े जाते हैं। यदि किसी बड़े नेता के समर्थक खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं तो उसका असर सीधे बूथ स्तर तक दिखाई देता है। यही कारण है कि भाजपा कार्यकर्ताओं की चुप्पी को भी अब राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इस मौके को भुनाने में जुटी दिखाई दे रही है। कांग्रेस नेताओं ने परिषद चुनाव में एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए संयुक्त प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। पार्टी के नेता और कार्यकर्ता लगातार वार्डों में जाकर लोगों से समर्थन मांग रहे हैं, जिससे मुकाबला और ज्यादा रोचक होता दिखाई दे रहा है।