ऋषि महाजन/जसूर। पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग-154 (NH-154) पर जसूर के मुख्य द्वार के समीप बने कॉजवे (Causeway) के पास सड़क की हालत बेहद खस्ता हो चुकी है। यहां सड़क पर पड़े गहरे गड्ढे अब लगातार हादसों और ट्रैफिक जाम का कारण बन रहे हैं।
रविवार को स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब इन मलबे और पानी से भरे गड्ढों में दो बसें अचानक फंस गईं। इसके चलते हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह ठप हो गया और यात्रियों सहित स्थानीय लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
गड्ढों में बसों के फंसने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद बसों को निकाला गया, जिसके बाद यातायात धीरे-धीरे सुचारू हो सका।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस मुख्य स्थान पर पिछले कई दिनों से बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं। कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन के समक्ष इस गंभीर समस्या को उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक इसे दुरुस्त करने के लिए कोई स्थायी कदम नहीं उठाया गया।
वर्तमान में बरसात के मौसम के कारण स्थिति और भी ज्यादा जानलेवा हो गई है। लगातार हो रही बारिश का पानी इन गड्ढों में भर जाता है, जिससे वाहन चालकों (विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों) को गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं मिल पाता। इससे यहाँ आए दिन छोटी-मोटी दुर्घटनाएं हो रही हैं।
जसूर के स्थानीय व्यापारियों ने भी सड़क की इस बदहाली पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि सड़क खराब होने के कारण वाहन रेंग-रेंग कर निकलते हैं, जिससे दुकान के ठीक सामने दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। लगातार लगने वाले इस जाम और उड़ती धूल/कीचड़ की वजह से ग्राहकों का दुकानों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है, जिसका सीधा असर उनके कारोबार पर पड़ रहा है। यदि समय रहते इस सड़क की मरम्मत नहीं की गई, तो यहां कोई भी बड़ा और घातक हादसा घटित हो सकता है।
क्षेत्रवासियों, वाहन चालकों और स्थानीय व्यापार मंडल ने लोक निर्माण विभाग (PWD) तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से पुरजोर मांग की है कि काजवे के पास के इस क्षतिग्रस्त हिस्से की तुरंत सुध ली जाए।
लोगों की मांग है कि यहां केवल मिट्टी-बजरी डालने के बजाय कंक्रीट या उच्च गुणवत्ता वाली बिटुमिनस (तारकोल) की परत बिछाई जाए, ताकि बरसात के पानी से यह दोबारा न उखड़े। स्थानीय जनता ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो वे चक्का जाम और आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।