ऋषि महाजन/नूरपुर। केरल के वायनाड भूस्खलन में जान गंवाने वाले जिला कांगड़ा के फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र के टकोली घिरथा निवासी विक्रम राणा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा।
सात दिन से बेटे के सकुशल लौटने की आस लगाए बैठे परिजनों की उम्मीदें उस समय टूट गईं, जब तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा। शव के गांव पहुंचते ही पूरा माहौल गमगीन हो गया और परिजनों की चीख-पुकार से हर आंख नम हो उठी।
परिजनों और ग्रामीणों की मौजूदगी में विक्रम राणा को अंतिम विदाई दी गई। अंतिम संस्कार के दौरान उनके बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस मार्मिक दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। विक्रम राणा अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं।
विक्रम राणा के भाई प्रमोद राणा ने बताया कि केरल सरकार, स्थानीय प्रशासन और राहत एवं बचाव दल ने पूरे समर्पण के साथ सर्च ऑपरेशन चलाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी परिवार की हरसंभव सहायता की, जिसके लिए परिवार उनका आभार व्यक्त करता है।
अंतिम संस्कार में पूर्व वन मंत्री राकेश पठानिया भी पहुंचे। उन्होंने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के हादसों में जान गंवाने वाले लोगों का बलिदान भी किसी शहादत से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि वह केंद्र सरकार से आग्रह करेंगे कि भविष्य में ऐसे हादसों में जान गंवाने वाले लोगों को भी शहादत जैसा सम्मान देने पर विचार किया जाए। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया।
इस दौरान फतेहपुर के एसडीएम रमन शर्मा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्होंने फतेहपुर में कार्यभार संभाला है और मामले की पूरी जानकारी प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जो भी सहायता संभव होगी, उसका प्रस्ताव बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा ताकि पीड़ित परिवार को राहत मिल सके।
गांव टकोली गिरथा में आज हर आंख नम थी। जिस बेटे, पति और पिता के लौटने की उम्मीद में परिवार सात दिन तक टकटकी लगाए बैठा रहा, वह आखिरकार लौटा तो तिरंगे में लिपटा हुआ। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और लोग दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिवार को इस असीम दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना कर रहे हैं।