ऋषि महाजन/नूरपुर। नन्हे बच्चे भगवान से अच्छे भविष्य की दुआ मांगते हैं, लेकिन खैरियां स्कूल के बच्चे प्रार्थना करते हैं कि बारिश न हो। बारिश होते ही सवाल खड़ा हो जाता है कि कक्षा कहां लगेगी। राजकीय प्राथमिक पाठशाला खैरियां में 33 बच्चों की पढ़ाई महज एक सुरक्षित कमरे में सिमट गई है। पांच कक्षाएं और दो शिक्षक इसी सीमित जगह में हैं।
स्कूल भवन के अधिकांश कमरों को असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। पांचों कक्षाओं की पढ़ाई अब एक कमरे में होती है। जगह की कमी से बच्चों को बारी-बारी से पढ़ाना पड़ता है। बारिश और धूप में बच्चों को पेड़ के नीचे बैठाना पड़ता है। स्कूल भवन का निर्माण वर्ष 1954-55 के आसपास हुआ था।
समय के साथ भवन जर्जर होता गया। सुरक्षित कमरे में महज एक खिड़की है। पांच कक्षाओं को पढ़ाना शिक्षकों के लिए चुनौती है। पंचायत प्रतिनिधियों, एसएमसी सदस्यों और ग्रामीणों ने चिंता जताई। ग्रामीणों के अनुसार भवन की खस्ता हालत को लेकर विभाग को कई बार अवगत करवाया गया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
हेड टीचर केवल सिंह ने बताया कि एक कमरा सुरक्षित होने के कारण पांचों कक्षाओं को बारी-बारी से वहीं पढ़ाना पड़ता है। बारिश और धूप में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। कमरे में केवल एक खिड़की है।
प्रधानाचार्य अजय गुप्ता ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है। विभाग को कई बार पत्र भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक आश्वासन ही मिले हैं। वन भूमि होने के चलते भी समस्या आ रही है। खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी वीना शर्मा ने बताया कि स्कूल भवन को असुरक्षित घोषित किया जा चुका है।
रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई है। फंड उपलब्ध होते ही पुराने भवन को गिराकर नए भवन का निर्माण करवाया जाएगा। स्थानीय लोगों के अनुसार स्कूल की इमारत शिक्षा विभाग के नाम दर्ज नहीं है, बल्कि वन विभाग के नाम है। ग्रामीणों ने जमीन शिक्षा विभाग के नाम दर्ज करने की मांग की है, ताकि नए भवन का बजट मिल सके।