ऋषि महाजन/नूरपुर। विधानसभा क्षेत्र नूरपुर में भाजपा की अंदरूनी लड़ाई अब पूरी तरह खुलकर सामने आ गई है। एक तरफ नूरपुर विधायक रणवीर सिंह निक्का और लोकसभा सांसद राजीव भारद्वाज नजर आ रहे हैं, तो दूसरी ओर पूर्व मंत्री राकेश पठानिया ने मोर्चा खोलते हुए दोनों नेताओं पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। बढ़ती बयानबाजी ने भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी को सार्वजनिक कर दिया है, जिससे क्षेत्र की सियासत गरमा गई है।
अपने निवास पर आयोजित पत्रकार वार्ता में राकेश पठानिया ने कहा कि वह भाजपा के पक्के सिपाही हैं, लेकिन जब से उन्होंने नूरपुर में भाजपा का किला फतह किया, तभी से उनके खिलाफ लगातार राजनीतिक षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर परिषद चुनाव में मिली हार का ठीकरा बार-बार उनके सिर फोड़ा जा रहा है, ताकि कुछ नेता अपनी राजनीतिक नाकामियों को छुपा सकें।
पठानिया ने कहा कि खुलेआम उनके राजनीतिक करियर को खत्म करने की बातें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि उनका चुनाव क्षेत्र बदलकर फतेहपुर कर दिया गया, लेकिन नूरपुर से उनका रिश्ता आज भी पहले जैसा मजबूत है। नूरपुर की जनता से मेरे सामाजिक और पारिवारिक संबंध हैं। मैं हर क्षेत्र में लोगों की सेवा के लिए हमेशा तैयार रहा, लेकिन विधायक और सांसद ने कभी मेरी जरूरत नहीं समझी।
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि फतेहपुर में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ नूरपुर के ही भाजपा नेताओं ने अपने सगे संबंधियों को मैदान में उतार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पार्टी में मापदंड केवल उनके लिए ही बनाए गए हैं।
पठानिया ने तंज कसते हुए कहा कि विधायक और सांसद खुद घर-घर जाकर चुनाव प्रचार करते रहे, लेकिन जब अपेक्षित सफलता नहीं मिली तो पूरा दोष उन पर डालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दोनों नेताओं से पूछा कि नूरपुर की अधूरी विकास योजनाओं और जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर वे कभी सड़कों पर क्यों नहीं उतरे और सरकार के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठाई।
उन्होंने दावा किया कि जब-जब जनता ने उन्हें बुलाया, वह लोगों की लड़ाई लड़ने के लिए सड़कों पर उतरे, लेकिन पार्टी के अपने नेताओं ने भी उनका साथ नहीं दिया। पठानिया ने कहा कि उन्होंने नूरपुर के विकास के लिए कई योजनाएं शुरू करवाईं और आज भी जनता का प्यार और समर्थन उनके साथ है।
पत्रकार वार्ता के दौरान बड़ी संख्या में उनके समर्थक मौजूद रहे। समर्थकों ने पठानिया के पक्ष में जोरदार नारेबाजी की, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गर्माता दिखाई दिया।
नूरपुर भाजपा में बढ़ती गुटबाजी और नेताओं के बीच खुली बयानबाजी ने अब पार्टी संगठन की चिंता बढ़ा दी है। पंचायती राज और जिला परिषद चुनावों से ठीक पहले छिड़ी यह अंदरूनी जंग भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बनती नजर आ रही है।