कांगड़ा। जिला कांगड़ा शुक्रवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए जिससे पुराने जख्म ताजा हो गए। 3 अप्रैल 2026 को आए इन झटकों ने 121 वर्ष पहले आई उस भीषण त्रासदी की यादें ताजा कर दी हैं, जब 4 अप्रैल 1905 को भारी तबाही मची थी।
बताया जा रहा है कि भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में था। भूकंप की तीव्रता 5.9 मापी गई है वहीं इसका केंद्र जमीन की सतह से 150 किलोमीटर अंदर था। हिमाचल के अलावा इस भूकंप के झटके दिल्ली-एनसीआर , पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में भी महसूस किए गए। इससे लोग डर के घरों के बाहर आ गए। हालांकि किसी तरह के जानी नुकसान की सूचना नहीं है।
गौर हो कि 4 अप्रैल 1905 को सुबह 6 बजकर 19 मिनट पर 7.8 तीव्रता के भूकंप ने पूरे कांगड़ा को तबाह कर दिया था। उस विनाशकारी भूकंप में लगभग 20 हजार लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी। इस बार भले ही झटके हल्के रहे और किसी प्रकार की जानमाल की हानि नहीं हुई, लेकिन समय का यह संयोग लोगों को सोचने पर मजबूर कर गया है। चिंता का विषय यह भी है कि पिछले कुछ दिनों में कांगड़ा क्षेत्र में यह दूसरी बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।
इस संदर्भ में प्रशासन भी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां पूरी हैं। हालांकि इस बार किसी प्रकार का नुक्सान नहीं हुआ, लेकिन कांगड़ा की धरती का बार-बार कांपना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियां लगातार सक्रिय हैं, ऐसे में लोगों को संभावित खतरे के प्रति जागरूक और सजग रहने की आवश्यकता है।
अगर भूकंप के वक्त आप घर में हैं तो फर्श पर बैठ जाएं।
घर में किसी मजबूत टेबल या फर्नीचर के नीचे बैठकर हाथ से सिर और चेहरे को ढकें।
भूकंप के झटके आने तक घर के अंदर ही रहें और झटके रुकने के बाद ही बाहर निकलें।
अगर रात में भूकंप आया है और आप बिस्तर पर लेटे हैं तो लेटे रहें, तकिए से सिर ढक लें।
घर के सभी बिजली स्विच को ऑफ कर दें।
अगर आप भूकंप के दौरान मलबे के नीचे दब जाएं तो किसी रुमाल या कपड़े से मुंह को ढक लें।
मलबे के नीचे खुद की मौजूदगी को जताने के लिए पाइप या दीवार को बजाते रहें, ताकि बचाव दल आपको तलाश सके। अगर आपके पास कुछ उपाय ना हो तो चिल्लाते रहें और हिम्मत ना हारें।
भूकंप के वक्त अगर आप घर से बाहर हैं तो ऊंची इमारतों और बिजली के खंभों से दूर रहें।
अगर आप गाड़ी चला रहे हो तो उसे रोक लें और गाड़ी से बाहर ना निकलें।
किसी पुल या फ्लाईओवर पर गाड़ी खड़ी ना करें। भूकंप के समय अगर आप घर में हैं तो बाहर ना निकलें।
अगर आप भूकंप के वक्त मलबे में दब जाएं तो माचिस बिल्कुल ना जलाएं। इससे गैस लीक होने की वजह से आग लगने का खतरा हो सकता है।
भूकंप आने पर घर में हैं तो चलें नहीं। सही जगह ढूंढें और बैठ जाएं। घर के किसी कोने में चले जाएं, कांच, खिड़कियों, दरवाज़ों और दीवारों से दूर रहें।
भूकंप के वक्त लिफ्ट के इस्तेमाल बिल्कुल ना करें। साथ ही कमज़ोर सीढ़ियों का इस्तेमाल भी न करें। क्योंकि लिफ्ट और सीढ़ियां दोनों ही टूट सकती हैं।
भूकंप में अगर मलबे में दब जाएं तो ज़्यादा हिले नहीं और धूल ना उड़ाएं। आपके आप-पास जो चीज मौजूद हो उसी से अपनी मौजूदगी जताएं।
भूकंप के दौरान आप पैनिक न करें और किसी भी तरह की अफवाह न फैलाएं।