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हिमाचल में बेचा नकली और मिलावटी पनीर तो खैर नहीं, होटल और ढाबों के लिए सख्त निर्देश जारी

ewn24 news choice of himachal 20 Aug,2026 7:13 pm


    निर्माण, बिक्री और आपूर्ति पर पूरी तरह रोक, अधिसूचना जारी


    शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले कृत्रिम यानी 'एनालॉग (गैर-दुग्ध) पनीर' पर पूरी तरह से शिकंजा कस दिया है। 

    स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन निदेशालय ने आदेश जारी कर प्रदेश में एनालॉग या गैर-दुग्ध पनीर के निर्माण, प्रोसेसिंग, स्टोरेज, परिवहन, वितरण और बिक्री पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है।

    अब दूध से इतर सामग्री—विशेषकर वनस्पति तेल, पाम ऑयल, स्टार्च या वनस्पति फैट से बने इस कृत्रिम उत्पाद को 'पनीर' बताकर बेचने या परोसने वालों पर सीधी कानूनी कार्रवाई होगी।

    फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की ओर से जारी आदेश के मुताबिक यह रोक एक साल तक लागू रहेगी। आदेश को इससे पहले वापस या संशोधित भी किया जा सकता है।

    क्या हैं जारी आदेश के मुख्य बिंदु?


    पनीर के नाम पर बिक्री पर रोक: कोई भी व्यापारी, डेयरी संचालक या विक्रेता गैर-दुग्ध या एनालॉग पनीर को असली पनीर बताकर नहीं बेच सकेगा।

    होटल-रेस्तरां के लिए सख्त निर्देश: होटल, ढाबे, कैटरिंग संस्थान, कैंटीन और मेस को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यदि वे किसी भी व्यंजन में गैर-दुग्ध घटक का उपयोग करते हैं, तो उन्हें इसकी स्पष्ट जानकारी ग्राहकों को देनी होगी; इसे 'पनीर' नाम से परोसना अपराध माना जाएगा।

    भ्रामक विज्ञापनों पर पाबंदी: किसी भी तरह के विज्ञापन या डिस्प्ले में इस उत्पाद को असली पनीर के रूप में प्रस्तुत करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

    क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?


    खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा चलाए गए सैंपलिंग अभियान के दौरान प्रदेश भर में एनालॉग पनीर के कई सैंपल फेल पाए गए थे। अकेले मंडी जिले में ही 20 से ज्यादा सैंपल फेल हुए, जहां इसे काफी छोटे अक्षरों में 'एनालॉग' लिखकर और असली पनीर का भ्रम पैदा करके बेचा जा रहा था।

    विशेषज्ञों के अनुसार, एनालॉग पनीर को सस्ता बनाने के लिए रिफाइंड तेल, पाम ऑयल और केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसका लगातार सेवन कैंसर जैसी घातक बीमारियों और पाचन संबंधी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।

    विभाग ने स्पष्ट किया है कि आम जनता को जागरूक करने के साथ-साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI) के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।


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