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रक्षाबंधन : जानें पूजा विधि और श्री कृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी पौराणिक कथा

ewn24 news choice of himachal 27 Aug,2026 11:26 pm


    भाई-बहन के अटूट स्नेह, समर्पण और सुरक्षा के प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व इस वर्ष 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, सावन माह की पूर्णिमा तिथि को यह पवित्र त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है।

    श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 09:08 बजे से प्रारंभ होकर 28 अगस्त 2026 को सुबह 09:48 (अढतालिस)  बजे समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को ही मनाया जाएगा।

    इस साल रक्षाबंधन पर सबसे अच्छी बात यह है कि 28 अगस्त की सुबह भद्रा काल का साया नहीं रहेगा, क्योंकि भद्रा काल 27 अगस्त को ही समाप्त हो जाएगा। इस कारण 28 अगस्त की सुबह का समय राखी बांधने के लिए अत्यंत शुभ और दोषमुक्त है। प्रातःकाल शुभ मुहूर्त सुबह 05:57 (सतावन) बजे से 09:48 (अढतालिस) बजे तक रहेगा।

    इसके अलावा दोपहर 12:04 बजे से 12:53 (तिरपन) बजे तक अभिजीत मुहूर्त और दोपहर 01:44 बजे से शाम 04:16 बजे तक अपराह्न काल का शुभ मुहूर्त रहेगा। हालांकि, सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक राहुकाल होने के कारण इस दौरान राखी बांधने से बचना चाहिए।

    रक्षाबंधन का इतिहास अत्यंत प्राचीन है और इसके पीछे कई धार्मिक व पौराणिक प्रसंग जुड़े हुए हैं। 

    रक्षाबंधन की प्रमुख पौराणिक कथाएं


    श्री कृष्ण और द्रौपदी: महाभारत काल में जब भगवान श्री कृष्ण ने शिशुपाल का वध करने के लिए सुदर्शन चक्र चलाया, तब उनकी उंगली कट गई और रक्त बहने लगा। यह देखकर माता द्रौपदी ने बिना सोचे अपनी साड़ी का आंचल फाड़कर श्री कृष्ण की उंगली पर बांध दिया। श्री कृष्ण ने इसे रक्षा सूत्र मानकर द्रौपदी को रक्षा का वचन दिया और इसी ऋण को चुकाने के लिए कौरवों की सभा में चीरहरण के समय द्रौपदी की लाज बचाई।

    माता लक्ष्मी और राजा बलि: पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर दानवीर राजा बलि से तीन पग में सब कुछ नाप लिया और उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया, तब भगवान विष्णु बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर उनके द्वारपाल बन गए। बैकुंठ में माता लक्ष्मी अकेली हो गईं। तब माता लक्ष्मी ने एक गरीब स्त्री का रूप धारण कर राजा बलि को रक्षा सूत्र (राखी) बांधा और उन्हें अपना भाई बनाया। उपहार के बदले माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को बैकुंठ वापस ले जाने का वचन मांग लिया।



    ऐतिहासिक संदर्भ


    रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं: इतिहास के अनुसार, जब मेवाड़ की रानी कर्णावती पर गुजरात के शासक बहादुर शाह ने आक्रमण किया, तब रानी ने अपनी और अपने राज्य की रक्षा के लिए मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजी थी। हुमायूं ने राखी की मर्यादा रखते हुए रानी कर्णावती की रक्षा के लिए अपनी सेना भेजी थी।

    सम्राट सिकंदर और राजा पुरु (पोरस): माना जाता है कि सिकंदर की पत्नी 'रोक्साना' ने राजा पुरु को रक्षा सूत्र भेजकर सिकंदर को युद्ध में न मारने का वचन मांगा था। युद्ध के मैदान में राजा पुरु ने जब सिकंदर पर प्रहार करना चाहा, तो हाथ में बंधा रक्षा सूत्र देखकर अपने कदम पीछे खींच लिए थे।


    राखी बांधने की सही विधि


    प्रातः स्नान करके पूजा की थाली तैयार करें, जिसमें रोली, अक्षत (चावल), चंदन, दीपक, मिठाई और राखी रखें।

    सबसे पहले अपने इष्टदेव और भगवान गणेश को रक्षा सूत्र अर्पित करें।

    भाई का मुख पूर्व या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) की ओर रखें।

    भाई के माथे पर रोली-अक्षत का तिलक लगाएं, सिर पर वस्त्र रखें, कलाई पर राखी बांधें और आरती उतारकर मिठाई खिलाएं।


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