ऋषि महाजन/नूरपुर। हिमाचल सरकार द्वारा 15 फीसदी महंगाई भत्ते ना दिए जाना पेंशनरों और कर्मचारियों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। क्योंकि आर्थिक तौर पर क्लास फोर पेंशनर और कर्मचारी से लेकर क्लास वन, पेंशनर,कर्मचारी को एक लाख रुपए से लेकर तीन लाख रुपए का सालाना नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह कहना है हिमाचल प्रदेश राज्य विधुत पेंशनर फोरम नूरपुर इकाई का।
बता दें कि हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत पेंशनर फोरम नूरपुर इकाई की मासिक बैठक विद्युत विश्राम गृह बोढ़ में इकाई प्रधान इंजीनियर मान सिंह धीमान की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस अवसर पर यूनिट सचिव अरुणा सहोत्रा, उपाध्यक्ष सुभाष चौधरी, जाटू राम ,जवाली इकाई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष इंजीनियर चैन सिंह पठानिया, ऑडिटर इंजीनियर कृष्ण धीमान ने संयुक्त बयान में कहा कि हिमाचल सरकार 15 प्रतिशत लंबित डीए (महंगाई भत्ता) और संशोधित वेतनमान की बकाया राशि शीघ्र जारी करे।
क्योंकि कर्मचारी और पेंशनर लंबे समय से आर्थिक भेदभाव झेल रहे हैं। महंगाई भत्ता केंद्र सरकार द्वारा बढ़ती महंगाई के मध्य नजर रखते हुए दिया जाता है। बैठक में पुरजोर मांग की गई कि पेंशनरों और कर्मचारियों को 15 फीसदी महंगाई भत्ता शीघ्र जारी किया जाए।
कहा कि स्मार्ट मीटर को लगाने में विद्युत बोर्ड प्रबंधक वर्ग बड़ी तेजी से कार्य कर रहा है, जिसका नूरपुर फोरम भी पुरजोर विरोध करता है, क्योंकि जब पुराने मीटर सही रीडिंग दे रहे हैं तो आठ हजार, दस हजार रुपए का स्मार्ट मीटर लगाने की क्या जरूरत है, जबकि एलटी की लाइनों में अगर देखा जाए तो ऐसा महसूस होता है कि बिजली की तारों को पेड़ों पर बांध दिया गया है।
लोगों को पूरी बिजली नहीं मिल रही हैं, जिस कारण टीवी, एसी,पंखे और फ्रिज घरों में नहीं चलते हैं। ऐसे में नए ट्रांसफार्मर लगाने की जरूरत है। पेड़ों की कटिंग करने की जरूरत है। जो पीवीसी तार जिसके माध्यम से बिजली की सप्लाई मीटर को दी गई है, उन पीवीसी तारों को पिछले 30 से 40 वर्ष में बदला ही नहीं गया, उनको बदलने की जरूरत है। न की स्मार्ट मीटर की जरूरत है। पहले विद्युत बोर्ड प्रबंधक वर्ग बिजली की लाइनों को स्मार्ट बनाए।