धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। राज्य में अब सांप के काटने (Snakebite) पर मरीजों को अस्पताल पहुंचने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि रास्ते में ही 108 एम्बुलेंस के भीतर 'एंटी-स्नेक वैनम' (Anti-Snake Venom) का तुरंत इलाज मिलना शुरू हो जाएगा।
इसी जीवन रक्षक पहल को धरातल पर उतारने और सांप के डंक से होने वाली मौतों को रोकने के लिए धर्मशाला में एक हाई-लेवल राज्य स्तरीय बैठक का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) हिमाचल प्रदेश द्वारा आयोजित इस बैठक में सांप के काटने से बचाव और नियंत्रण के लिए 'स्टेट एक्शन प्लान' को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने इस राष्ट्रीय मुहिम के तहत हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले को एक विशेष डैमोंस्ट्रेशन साइट (Demonstration Site) के रूप में चुना है। धर्मशाला में हो रही इस अहम बैठक में देश और प्रदेश के जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञ, वन विभाग, आपदा प्रबंधन और पंचायती राज सहित कई विभागों के आला अधिकारी मंथन कर रहे हैं। इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में साल 2030 तक सांप के काटने से होने वाली मौतों और विकलांगता को 50 फीसदी (आधा) तक कम करना है।
प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सांप के डंक को एक अधिसूचित बीमारी (Notified Disease) घोषित कर दिया है। इसके तहत अब राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए सांप के काटने के हर एक मामले की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपनी अनिवार्य होगी।
हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में सांप का काटना हमेशा से एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती रहा है। विशेषकर कांगड़ा, ऊना, चम्बा, मंडी और सिरमौर जैसे जिलों में मानसून के सीजन में इसके मामलों में भारी उछाल आता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में हर साल करीब 76 लोग सर्पदंश के कारण अपनी जान गंवा देते हैं।
इस नई नीति के जरिए स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य विभिन्न विभागों के साथ मिलकर इन मौतों के आंकड़े को न्यूनतम स्तर पर लाना है। इसके लिए प्रदेश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) से लेकर क्षेत्रीय और जोनल अस्पतालों तक एंटी-स्नेक वैनम की 24 घंटे उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
कांगड़ा के जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने बताया कि कांगड़ा जिला सांप के काटने के मामलों के लिहाज से भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील है। यही कारण है कि आईसीएमआर (ICMR) ने हमारे जिले को अपनी इस विशेष परियोजना के लिए चुना है। आज होने वाली इस राज्य स्तरीय बैठक में सभी विभागों के समन्वय (Coordination) से एक बेहद मजबूत और फुलप्रूफ कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि कीमती इंसानी जानों को समय रहते बचाया जा सके।