रिकांगपिओ। किन्नौर कैलाश यात्रा के आधिकारिक रूप से शुरू होने के बाद पहले दिन तंगलिंग गांव से 107 श्रद्धालु रवाना हुए। इनमें पांच महिलाएं भी शामिल रहीं। पहले दिन ऑनलाइन पंजीकरण कराने वाले 175 श्रद्धालुओं में से मात्र 50 लोग ही पहुंचे। दोपहर 12 बजे तक 57 श्रद्धालुओं ने तंगलिंग बेस कैंप में ऑफलाइन पंजीकरण कराया।
ऑफलाइन पंजीकरण करवाने वाले इन लोगों को भी यात्रा पर भेजा गया। जिन श्रद्धालुओं ने दोपहर 12 बजे के बाद पंजीकरण करनाया, उन्हें अगले दिन यात्रा पर भेजा जाएगा। यात्रा वीरवार से शुरू हुई है। किन्नौर कैलाश यात्रा का 16 किलोमीटर लंबा मार्ग अत्यंत दुर्गम है।
श्रद्धालुओं को 6,050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित प्राकृतिक शिवलिंग तक पहुंचना होता है। रास्ते में उफनती नदियां, ग्लेशियर और ऑक्सीजन की कमी जैसी गंभीर बाधाएं आती हैं। यह मार्ग अपनी कठिनाइयों के लिए जाना जाता है, जिसके लिए विशेष तैयारी की आवश्यकता होती है।
बता दें कि श्रद्धालु बेसब्री से किन्नौर कैलाश यात्रा के इंतजार में थे। ऐसे में यात्रा शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। भगवान शिव के जयकारों से क्षेत्र गूंज उठा। हालांकि पहले दिन श्रद्धालुओं की संख्या कम रही, लेकिन आगे संख्या में बढ़ोतरी के आसार हैं।
प्रशासन श्रद्धालुओं को रवाना करने से पहले पूरी जांच पड़ताल कर रहा है। चिकित्सा फिटनेस प्रमाण की जांच के बाद ही श्रद्धालुओं को यात्रा पर भेजा गया। कुछ श्रद्धालुओं ने फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं बनाए थे, उनकी मौके पर जांच की गई। वहीं, प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। पूरे ट्रैक पर चिकित्सा, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं।
प्रशासन ने मार्ग पर जोखिम वाली जगहों पर रस्सियां लगाई हैं। तंगलिंग बेस कैंप पर करीब 60 श्रद्धालुओं के रहने की मुफ्त व्यवस्था की गई है। यात्रा के दूसरे बेस कैंप गणेश बाग में निजी शिविरों में 1300 रुपये प्रति श्रद्धालु निर्धारित किए हैं।
इन राशि एक बिस्तर, रात का भोजन और सुबह का नाश्ता मिलेगा। प्रशासन ने एक दिन में कुल 375 श्रद्धालुओं को ही यात्रा की अनुमति दी है। 4 अगस्त तक ऑनलाइन पोर्टल पर सभी स्लॉट बुक हैं। प्रशासन अब ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल 5 अगस्त को फिर से खोलेगा। ऑफलाइन पंजीकरण तंगलिंग बेस कैंप पर रोजाना हुआ करेगा।