अंकित चौधरी, सूरज प्रकाश डिंपू\हरिपुर। हिमाचल प्रदेश के देहरा विधानसभा क्षेत्र के तहत हरिपुर तहसील की बंगोली पंचायत में स्थित एक ऐतिहासिक व प्राचीन तालाब आज अपने अस्तित्व की जंग लड़ रहा है।
कभी क्षेत्र की शान रहा यह प्राचीन तालाब वर्तमान में जीर्णोद्धार (मरम्मत) के लिए तरस रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि यह तालाब अब स्थानीय ग्रामीणों के लिए जी का जंजाल बन चुका है।
तालाब की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें पानी टिकता ही नहीं है। जैसे ही बारिश होती है और तालाब में पानी भरता है, वह तुरंत नीचे ड्रेन (रिसने) हो जाता है। इस पानी के रिसाव के कारण तालाब के साथ लगते तीन-चार घरों की नींव को खतरा पैदा हो गया है और उन पर ढहने का साया मंडरा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत इस तालाब को साल 2022-23 में 'अमृत सरोवर' घोषित किया गया था। उम्मीद थी कि इस योजना से तालाब की कायाकल्प होगी, लेकिन धरातल पर यह सिर्फ कागजी दावा बनकर रह गया।
आज स्थिति यह है कि तालाब में पानी की एक बूंद नहीं है, बल्कि चारों तरफ लंबी-लंबी घास उग आई है। तालाब के किनारों पर भांग और अन्य नशीले खरपतवार के पौधे उग चुके हैं। पंचायत के बीचोंबीच स्थित होने के कारण यह बदहाली पूरे क्षेत्र की सुंदरता पर ग्रहण लगा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार जल संरक्षण के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन हमारे सामने एक जीता-जागता उदाहरण है जहां अमृत सरोवर योजना सफेद हाथी साबित हो रही है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो भारी बारिश में साथ लगते घर कभी भी जमींदोज हो सकते हैं।
तालाब की इस दुर्दशा और घरों पर बढ़ते खतरे को देखते हुए स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा है। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और देहरा की स्थानीय विधायक कमलेश ठाकुर से पुरजोर मांग की है कि इस प्राचीन तालाब का बजट जारी कर जल्द से जल्द जीर्णोद्धार करवाया जाए।
अमृत सरोवर योजना के तहत हुए काम की तकनीकी जांच करवाई जाए कि आखिर तालाब में पानी क्यों नहीं रुक रहा है और इसके रिसाव की मुख्य वजह क्या है। तालाब के साथ लगते घरों को सुरक्षित करने के लिए तुरंत उचित कदम उठाए जाएं।