चंबा। युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष दिवंगत चंद्रमणि कुलेठी को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी, समर्थक, परिचित और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता व कार्यकर्ता पहुंचे। लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। चंद्रमणि के असामयिक निधन से होली क्षेत्र में शोक की लहर है।
चंद्रमणि कुलेठी की अंतिम यात्रा में कांग्रेस और भाजपा सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी चंद्रमणि कुलेठी की अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए होली आने वाले थे। अंतिम यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री क्षेत्र में नहीं पहुंचे थे और उनके जल्द पहुंचने की संभावना जताई गई थी। चंद्रमणि कुलेठी की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से क्षेत्र में उनके निधन को लेकर शोक की व्यापकता दिखाई दी।
बता दें कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के प्रस्तावित दौरे को लेकर होली क्षेत्र में तैयारियां चल रही थीं। चंद्रमणी कुलेठी भी इस आयोजन से जुड़ी तैयारियों में सक्रिय थे। रात के समय पोस्टर, बैनर और झंडे लगाने के दौरान वह बिजली की तारों की चपेट में आ गए। करंट लगने से उनकी मौत हो गई। जिस व्यक्ति के लिए घर पर परिवार इंतजार कर रहा था, उसके लौटने के बजाय वहां पहुंची एक ऐसी खबर, जिसने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
चंद्रमणी कुलेठी हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष थे। संगठन की गतिविधियों में उनकी भागीदारी थी और वह क्षेत्र में राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारियों में सक्रिय रहते थे। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे से जुड़ा काम भी इसी सक्रियता का हिस्सा था। लेकिन इस हादसे ने उनके जीवन का सफर अचानक समाप्त कर दिया।
किसी भी सार्वजनिक आयोजन की तैयारियों में जुटे लोगों की मेहनत अक्सर मंच, कार्यक्रम और व्यवस्थाओं के पीछे छिपी रहती है। ऐसे कामों के दौरान सुरक्षा का महत्व भी सामने आता है। चंद्रमणी की मौत ने एक परिवार को अपूरणीय क्षति पहुंचाई और क्षेत्र में शोक का माहौल पैदा कर दिया।
चंद्रमणी अपने पीछे पत्नी, दो साल के बेटे और माता-पिता को छोड़ गए हैं। उनका बेटा अभी उस उम्र में है, जब बच्चे अपने आसपास की दुनिया को समझना शुरू करते हैं और माता-पिता का साथ ही उनके लिए सबसे बड़ी सुरक्षा होता है। अब परिवार को उस कमी के साथ आगे बढ़ना होगा, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता। बच्चे के भविष्य, उसकी परवरिश और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच चंद्रमणी की अनुपस्थिति लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
परिवार के लिए यह दुख इसलिए भी गहरा है, क्योंकि वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। जानकारी के अनुसार, उनके पिता का हाल ही में ऑपरेशन हुआ था। ऐसे समय में बेटे को खोने का दर्द परिवार के लिए बेहद कठिन परिस्थिति लेकर आया है।
चंद्रमणी कुलेठी की पहचान केवल एक राजनीतिक पदाधिकारी के रूप में नहीं थी। वह एक परिवार के सदस्य, पति, पिता और बेटे भी थे। सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने वाले व्यक्ति के पीछे भी एक निजी दुनिया होती है परिवार की उम्मीदें, बच्चों के सपने और आने वाले वर्षों की योजनाएं। उनके निधन ने यही याद दिलाया कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके पद से आगे बढ़कर उसके रिश्तों और जिम्मेदारियों से भी बनती है। राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय चंद्रमणी के असमय चले जाने से उनके परिवार के साथ-साथ उनसे जुड़े लोगों को भी गहरा आघात पहुंचा है।
पुलिस ने घटना के संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, बिजली की तारों के संपर्क में आने की वजह क्या थी और घटना के दौरान सुरक्षा की क्या व्यवस्था थी इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।