शिमला। हिमाचल भर में रविवार को कारगिल के रणबांकुरों के शौर्य और बलिदान को नमन किया। मौका कारगिल विजय दिवस का था। मंडी जिला के टिहरा में आयोजित राज्य स्तरीय कारगिल विजय दिवस समारोह में वीर नारियों, पूर्व सैनिकों तथा देश के विभिन्न युद्धों में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद सैनिकों के परिजनों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता व सैनिक कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनीराम शांडिल ने शॉल, टोपी एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
उन्होंने कारगिल युद्ध में शहीद गांव हवाणी रिवालसर के नायक सरवन कुमार की पत्नी कांता देवी, साइगलू (कोटली) निवासी शहीद सूबेदार खेम चंद की पत्नी प्रोमिला देवी, वीना देवी पत्नी सिपाही टेक सिंह मस्ताना गांव स्योह बल्ह तथा सरला देवी पत्नी शहीद नायक अशोक कुमार, गांव सहैल बल्ह को सम्मानित किया।
इसके अतिरिक्त 1962 इंडो-चाइना युद्ध में शहीद हुए हरि सिंह निवासी बंदला अनार देवी,1965 के युद्ध में शहीद नेक राम गांव चंदपुर की पत्नी कमला देवी, वर्ष 1999, 2002 तथा 2014 में ऑपरेशन रक्षक के दौरान वीरगति को प्राप्त जवानों के परिजनों में प्रमिला देवी पत्नी शहीद हवालदार भाग सिंह गांव धुली, राज कुमारी पत्नी शहीद देश राज गांव चढवालका, कुसुम ठाकुर पत्नी शहीद सिपाही प्रदीप कुमार गांव सरौन, निशा कुमारी पत्नी शहीद नायब सूबेदार राजेश कुमार गांव लगयार को सम्मानित किया।
डॉ. शांडिल ने विभिन्न युद्धों में वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों के आश्रितों को भी सम्मानित किया जिनमें प्रजीत ठाकुर गांव करियल, करोधो देवी गांव सनदेहडा, चमारू राम गांव रोसो, ज्ञान चंद गांव डगवानी, रजनी देवी गांव कोट, दर्शनू देवी गांव गद्दीधार शामिल हैं। कारगिल युद्ध में घायल हुए नायब सूबेदार पुरूषोतम शर्मा गांव डगवानी को भी सम्मानित किया गया।
वीरता के लिए पुरस्कृत सैनिकों को भी इस मौके पर सम्मानित किया गया जिनमें हवलदार प्रकाश चंद जोकि शौर्य चक्र प्राप्त करता है गांव मोरतन, लांस नायक प्रवीण कुमार गांव झड़ियार शौर्य चक्र विजेता, सीएचएम रहीम सिंह गांव गद्दीदार सेना मेडल से पुरस्कृत हैं, उन्हें भी सम्मानित किया गया।
वहीं, भूतपूर्व सैनिक लीग कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति द्वारा कारगिल विजय दिवस का आयोजन बहुउद्देश्यीय भवन में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता के लीग के अध्यक्ष सेवानिवृत ब्रिगेडियर टी.एस. ठाकुर ने की। इस अवसर पर कारगिल युद्ध में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके अदम्य साहस, वीरता एवं सर्वोच्च बलिदान को स्मरण किया गया।
ठाकुर ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह दिवस कारगिल के अमर शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को स्मरण करने और उनसे प्रेरणा लेने का अवसर है। वर्ष 1999 में भारतीय सैनिकों ने अत्यंत विषम परिस्थितियों में अद्वितीय शौर्य का परिचय देते हुए दुश्मनों को परास्त कर देश की सीमाओं की रक्षा की थी। यह विजय पूरे राष्ट्र के लिए गर्व और गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल सैन्य विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि वीर जवानों के अद्वितीय साहस और सर्वोच्च बलिदान को स्मरण करने का अवसर है, जिनके त्याग से देश की सीमाएं सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि कारगिल के वीर सैनिकों का बलिदान सदैव देशवासियों, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
उन्होंने युवाओं से राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं सुरक्षा के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम का शुरुआत में राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता की रक्षा तथा देश की सुरक्षा के लिए सदैव समर्पित रहने की शपथ ली। इस अवसर पर पूर्व सैनिकों ने अपने विचार एवं अनुभव साझा किए तथा उपस्थित लोगों में देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की भावना का संचार किया।
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रविवार को उपायुक्त कार्यालय परिसर में सहायक आयुक्त (उपायुक्त) विवेक चैहान के नेतृत्व में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता की रक्षा तथा देश की सुरक्षा के लिए सदैव समर्पित रहने की शपथ ली। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके अदम्य साहस, वीरता और सर्वोच्च बलिदान को स्मरण किया।
इस अवसर पर विवेक चौहान ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है, यह दिवस कारगिल के अमर शहीदों का बलिदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।